सोमवार, 19 मई 2014

अग्निहोत्र अथवा होम मे चार प्रकार के द्रव्य होते हैं-



*अग्निहोत्र अथवा होम मे चार प्रकार के द्रव्य होते हैं-----
१. सुगंधित – कस्तूरी , केशर , अगर , तगर , इलायची , जायफल आदि ।
२. पुष्टिकारक – घृत , दूध , फल , कन्द ,अन्न , चावल , गेहूं , उङद आदि ।
३. मिष्ट – शक्कर , शहद , छुवारे , दाख आदि ।
४. रोगनाशक – सोमलता अर्थात गिलोय आदि ।
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यज्ञकुन्ड का परिमाण – सम चौरस हो , जितना चौङा हो उतना ही गहरा हो तथा
नीचे की चौङाई ऊपर की चौङाई की १/४ अर्थात चतुर्थांस हो ।
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यज्ञसमिधा किस लकङी की हो --- पलाश , शमी, पीपल , बङ , गूलर , आम , बिल्व आदि की हो ।
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ऋत्विजों के लक्षण – अच्छे विद्वान , धार्मिक , जितेन्द्रिय , कर्म करने में कुशल , निर्लोभी , परोपकारी , दुर्व्यसनों से रहित , कुलीन , सुशील , वैदिक मत वाले हों ,यज्ञ में ये १ , २ , ३ अथवा चार हों ।
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यजमान सपत्नी ( अगर हो तो ) पूर्व की ओर मुह करके बैठे , पत्नी , पति के दांई ओर बैठे ।
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यज्ञ मे यजमान सफेद वस्त्र ही पहिनें ।
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यज्ञ पात्र सुवर्ण , चांदी , कांसा , काष्ठ आदि के हों ।
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कम से कम छह मास घ्रत की प्रत्येक आहुती अवश्य देवें ।
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जातकर्म संस्कार मे घी और मधु दोनों बराबर मिलाकर ,सोने की शलाका से बालक की जीभ पर
‘
ओ३म’ लिखे तथा दक्षिण कान में ‘वेदोसीति’ अर्थात तेरा गुप्तनाम वेद है ऐसा सुनाए । तथा तालू
पर घृत का फोहा रखे ।
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नाम करण संस्कार – यह जन्म से लेके १० दिन छोङ ११वें वा १०१ वें दिन अथवा दूसरे
वर्ष के आरम्भ में जिस दिन जन्म हुआ हो , नाम धरे ।

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