शुक्रवार, 23 मई 2014

“सत्यार्थ प्रकाश” ज्योतिष शास्त्र झूठा है

“सत्यार्थ प्रकाश”
ज्योतिष शास्त्र झूठा है--

 

प्रश्न----क्या जो यह संसार में राजा प्रजा सुखी दु:खी हो रहे हैं यह ग्रहों
का फल नहीं है?

उत्तर----नहीं ये सब पाप पुण्यों के फल है ।
 

प्रश्न --- क्या ज्योतिष शास्त्र झूठा है?
उत्तर----नहीं जो उसमें अंक बीज रेखागणित विद्या है वह सब सच्ची
जो फल की लीला है वह सब झूठी है ।
 

प्रश्न----क्या जो यह जन्मपत्रा है सो निष्फल है ?
उत्तर----हां वह जन्मपत्रा नहीं किन्तु उसका नाम ‘शोकपत्रा’ रखना चाहिये
क्योंकि जब सन्तान का जन्म होता है तब सब को आनन्द होता है परन्तु वह आनन्द
तब तक होता है कि जब तक जन्मपत्रा बनके ग्रहों का फल न सुने जब पुरोहित
जन्मपत्रा बनाने को कहता है तब उस के माता पिता पुरोहित से कहते हैं--’महाराज!
आप बहुत अच्छा जन्मपत्रा बनाइये’ जो ध्नाढव् हों तो बहुत सी लाल पीली रेखाओं
से चित्रा विचित्रा और निर्धन हो तो साधरण रीति से जन्मपत्रा बनाके सुनाने को
आता है तब उसके मां बाप ज्योतिषी जी के सामने बैठ के कहते हैं--’इस का
जन्मपत्रा अच्छा तो है?’ ज्योतिषी कहता है--’जो है सो सुना देता हूं इसके जन्मग्रह
बहुत अच्छे और मित्राग्रह भी बहुत अच्छे हैं जिन का फल ध्नाढव् और प्रतिष्ठावान्
जिस सभा में जा बैठेगा तो सब के ।पर इस का तेज पड़ेगा शरीर से आरोग्य
और राज्यमानी होगा’ इत्यादि बातें सुनके पिता आदि बोलते हैं--’वाह वाह ज्योतिषी
जी! आप बहुत अच्छे हो’ ज्योतिषी जी समझते हैं इन बातों से कार्य सिद्ध नहीं
होता तब ज्योतिषी बोलता है--’ये ग्रह तो बहुत अच्छे हैं परन्तु ये ग्रह क्रूर हैं अर्थात्
फलाने-फलाने ग्रह के योग से व वर्ष में इस का मृत्युयोग है’ इस को सुन के
माता पितादि पुत्रा के जन्म के आनन्द को छोड़ के शोकसागर में डूब कर ज्योतिषी
से कहते हैं कि ‘महाराज जी! अब हम क्या करें?’ तब ज्योतिषी जी कहते हैं--
‘उपाय करो’ गृहस्थ पूछे ‘क्या उपाय करें’ ज्योतिषी जी प्रस्ताव करने लगते हैं
कि ‘ऐसा-ऐसा दान करो ग्रह के मन्त्रा का जप कराओ और नित्य ब्रांणों को
भोजन कराओगे तो अनुमान है कि नवग्रहों के विघ्न हट जायेंगे’ अनुमान शब्द
इसलिये है कि जो मर जायेगा तो कहेंगे हम क्या करें परमेश्वर के ऊपर कोर्इ नहीं
है हम ने तो बहुत सा यत्न किया और तुम ने कराया उस के कर्म ऐसे ही थे
और जो बच जाय तो कहते है कि देखो--हमारे मन्त्रा देवता और ब्रह्मणों की कैसी
सिद्धि है? तुम्हारे लड़के को बचा दिया यहां यह बात होनी चाहिये कि जो इनके
जप पाठ से कुछ न हो तो दूने तिगुने रुपये उन धूर्तो से ले लेने चाहिये और बच
जाय तो भी ले लेने चाहिये क्योंकि जैसे ज्योतिषियों ने कहा कि ‘इस के कर्म
और परमेश्वर के नियम तोड़ने का सामर्थ्य किसी का नहीं ।’ वैसे गृहस्थ भी कहें
कि ‘यह अपने कर्म और परमेश्वर के नियम से बचा है तुम्हारे करने से नहीं’
और तीसरे गुरु आदि भी पुण्य दान करा के आप ले लेते हैं तो उनको भी वही
उत्तर देना जो ज्योतिषियों को दिया था ।
अब रह गर्इ शीतला और मन्त्रा तन्त्रा यन्त्रा आदि ये भी ऐसे ही ढोंग मचाते
है । कोर्इ कहता है कि ‘जो हम मन्त्रा पढ़ के डोरा वा यन्त्रा बना देवें तो हमारे देवता
और पीर उस मन्त्रा यन्त्रा के प्रताप से उस को कोर्इ विघ्न नहीं होने देते’ उन को
वही उत्तर देना चाहिये कि क्या तुम मृत्यु परमेश्वर के नियम और कर्मफल से
भी बचा सकोगे? तुम्हारे इस प्रकार करने से भी कितने ही लड़के मर जाते हैं और
तुम्हारे घर में भी मर जाते हैं और क्या तुम मरण से बच सकोगे? तब वे कुछ
भी नहीं कह सकते और वे धूर्त जान लेते हैं कि यहां हमारी दाल नहीं गलेगी
इस से इन सब मिथ्या व्यवहारों को छोड़ कर धर्मिक सब देश के उपकारकर्ना
निष्कपटता से सब को विद्या पढ़ाने वाले उनम विद्वान् लोगों का प्रत्युपकार करना
जैसा वे जगत् का उपकार करते हैं इस काम को कभी न छोड़ना चाहिये और
जितनी लीला रसायन मारण मोहन उच्चाटन वशीकरण आदि करना कहते हैं
उन को भी महापामर समझना चाहिये ।

कोई टिप्पणी नहीं: